मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययता और ईंधन संरक्षण की अपील को धरातल पर उतारने के लिए एक मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने स्वयं के काफिले (कारकेड) और राज्य के मंत्रियों के दौरों के लिए सख्त और सादगीपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
काफिले में कटौती और वाहन रैलियों पर रोक
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब उनके काफिले में केवल सुरक्षा की दृष्टि से न्यूनतम और आवश्यक वाहन ही शामिल होंगे। इस पहल के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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नो वाहन रैली: अब मुख्यमंत्री के किसी भी दौरे या भ्रमण के दौरान भारी-भरकम वाहन रैलियां आयोजित नहीं की जाएंगी।
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मंत्रियों से अपील: सीएम ने कैबिनेट के सभी मंत्रियों से भी आग्रह किया है कि वे यात्रा के समय कम से कम गाड़ियों का उपयोग करें।
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दिखावे से दूरी: नवनियुक्त निगम-मंडल पदाधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना कार्यभार सादगी के साथ ग्रहण करें।
राष्ट्रहित सर्वोपरि: ईंधन और डॉलर बचाने की मुहिम
डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले को सीधे तौर पर राष्ट्रहित और अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। उनका मानना है कि:
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ईंधन संरक्षण: पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर होने वाला देश का खर्च (डॉलर) भी बचेगा।
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अनुशासन और परिवर्तन: मुख्यमंत्री के अनुसार, देश को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने के लिए वीआईपी संस्कृति को छोड़कर जीवन पद्धति में अनुशासन लाना अनिवार्य है।
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सार्वजनिक परिवहन का संदेश: मुख्यमंत्री ने खुद दिल्ली मेट्रो में सफर कर यह साबित किया कि 'विकास और विश्वास' आमजन के साथ जुड़कर ही मजबूत होते हैं।
जनता से अपील: 'पब्लिक ट्रांसपोर्ट' अपनाएं
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से भी भावुक अपील की है। उन्होंने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी मेट्रो यात्रा साझा करते हुए नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी दैनिक दिनचर्या में सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) को प्राथमिकता दें।
"आदरणीय प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर मध्य प्रदेश राष्ट्रहित में संकल्पित है। आगामी आदेश तक मेरे कारकेड में न्यूनतम वाहन होंगे। हम सबको मिलकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।" — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री