देशभर की मंडियों में प्याज की आवक घटने से आम आदमी की रसोई का बजट एक बार फिर गड़बड़ा गया है। पिछले एक हफ्ते के भीतर प्याज की कीमतों में 40% तक का उछाल देखा गया है। दिल्ली, मुंबई और जयपुर जैसे शहरों में जो प्याज ₹30-35 प्रति किलो बिक रही थी, वह अब ₹50 से ₹60 के पार पहुंच गई है। विशेष रूप से नासिक और पुणे की मंडियों में थोक भाव बढ़ने का असर अब सीधे रिटेल मार्केट पर पड़ रहा है।
कीमतें बढ़ने के 5 मुख्य कारण
- फसल को नुकसान: महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की तैयार फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है, जिससे मंडियों में आवक (Supply) कम हो गई है।
- सप्लाई गैप: पुरानी प्याज का स्टॉक अब खत्म होने की कगार पर है और नई खरीफ फसल आने में अभी समय है। इस बीच के समय में मांग बढ़ने से दाम बढ़ रहे हैं।
- निर्यात नीति की सुगबुगाहट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की बढ़ती मांग और निर्यात प्रतिबंधों में ढील की खबरों ने व्यापारियों को स्टॉक जमा करने के लिए उकसाया है।
- लॉजिस्टिक्स खर्च: कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और बढ़ते डीजल के दामों ने परिवहन लागत (Transportation Cost) बढ़ा दी है, जिससे प्याज की लैंडिंग कीमत बढ़ गई है।
- जमाखोरी का डर: मंडियों में बिचौलियों द्वारा कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों ने भी कीमतों को हवा दी है।
सरकार की 'राहत' वाली तैयारी
बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड के तहत अपने 'बफर स्टॉक' से प्याज जारी करना शुरू कर दिया है। NAFED और NCCF के जरिए प्रमुख शहरों में ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर मोबाइल वैन और सरकारी केंद्रों के माध्यम से प्याज बेची जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले 15 दिनों में बाजार में अतिरिक्त सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को पुनः ₹40 के नीचे लाया जाए।